
दिल्ली में प्रदूषण पर काबू पाने के लिए की गई क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) की कोशिश नाकाम रही। शुक्रवार को दिल्ली के ऊपर विशेष विमान से केमिकल छिड़काव किया गया, लेकिन चार घंटे बाद भी एक बूंद बारिश नहीं हुई। सरकार ने इसे “प्रदूषण कम करने की वैकल्पिक कोशिश” बताया था, मगर नतीजा उम्मीदों के विपरीत रहा।जानकारी के मुताबिक, IIT कानपुर और दिल्ली सरकार की टीम ने संयुक्त रूप से यह प्रयोग किया था। क्लाउड सीडिंग के दौरान बादलों में सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड जैसे कण छोड़े गए थे ताकि नमी बढ़े और बारिश शुरू हो सके। मौसम विभाग के मुताबिक, जिस समय सीडिंग की गई, तब दिल्ली-एनसीआर में बादल बहुत हल्के थे और वातावरण में नमी 45% से कम थी, जिससे बारिश बनने की संभावना बेहद कमजोर थी।
प्रयोग के असफल रहने के बाद AAP सरकार ने केंद्र पर निशाना साधा। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा, “हमने यह प्रयोग केंद्र के वैज्ञानिकों के सुझाव पर किया, लेकिन जब बारी बारिश की आई, तो जो दो-तीन बादल थे, वे भी चले गए।” वहीं भाजपा ने इसे “राजनीतिक स्टंट” करार दिया और कहा कि प्रदूषण पर ठोस कदमों के बजाय सरकार दिखावे की कार्रवाई कर रही है। इस बीच, दिल्ली में शुक्रवार को AQI 480 के पार पहुंच गया — यानी “गंभीर श्रेणी” में। विशेषज्ञों का कहना है कि क्लाउड सीडिंग तभी असरदार होती है जब वातावरण में पर्याप्त बादल और नमी हो, अन्यथा इससे परिणाम नहीं मिलते।









