
नई दिल्ली। देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद उपराष्ट्रपति के लिए आज मतदान होगा। मुकाबला है दो मजबूत दावेदारों के बीच — राधाकृष्णन और रेड्डी। दोनों ही नेताओं के पास अनुभव है, समर्थन भी है, लेकिन तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। इस बीच ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और तेलंगाना के सीएम केसीआर ने अपनी पार्टियों को इस चुनाव से दूर रखकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
बीजद और बीआरएस क्यों अलग?
पटनायक और केसीआर दोनों ऐसे नेता हैं जो आमतौर पर किसी एक खेमे में खुलकर नहीं उतरते। इस बार भी दोनों ने दूरी बनाकर यही संदेश देने की कोशिश की है कि वो अभी अपने पत्ते नहीं खोलना चाहते। ऐसे में क्या यह दूरी भविष्य की किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
कौन पलड़े में भारी?
राधाकृष्णन को केंद्र के सहयोगी दलों का समर्थन हासिल है।
रेड्डी को विपक्षी दलों ने उम्मीदवार बनाया है, लेकिन समर्थन को लेकर संशय बना हुआ है।
इस चुनाव के नतीजे भले ही तुरंत ज़मीनी राजनीति न बदलें, लेकिन इससे राजनीतिक संदेश ज़रूर जाएगा।
ख़ामोशी में भी है सियासत
नवीन और केसीआर की खामोशी को यूं ही नहीं लिया जा सकता। दोनों नेता आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तीसरे मोर्चे की संभावनाएं तलाश रहे हैं।मतदान आज होगा, नतीजे शाम तक आएंगे। लेकिन असली सवाल ये रहेगा. इस चुनाव के पीछे की चुप्पी क्या कहती है?









