लखनऊ। मुह छुपाइये आप नवाबो की नगरी लखनऊ में है
हर दिन 5000 से ज्यादा संक्रमित अकेले राजधानी में मिल रहे
यूपी की राजधानी अब कोरोना की राजधानी बन चुकी है
राजधानी के दर्जनों अस्पतालों में ऑक्सीजन नही है
कोविड कंट्रोल सेंटर के बाहर मरीज तड़प रहे है
एम्बुलेंश भी मरीजो को समय पर नही मिल रही है
एम्बुलेंश की जगह स्कूली वैन,ई रिक्शा,ऑटो रिक्शा का सहारा ले रहे लोग
स्वास्थ्य व्यवस्थाए पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है
अस्पतालों में भर्ती मरीजो की जान का भी संकट ऑक्सीजन की कमी से हो गया है
कहने को हम स्मार्ट सिटी बन गए है लेकिन व्यवस्थाए थर्ड क्लास सिटी वाली भी नही है।
जिम्मेदार cmo डॉ संजय भटनागर किसी हिटलर से कम नही है मरीज तड़प तड़प कर जान भले ही दे दे लेकिन cmo का फोन नही उठेगा।
आखिर क्यों इतनी मेहरबानी लापरवाह cmo पर
राजधानी में कोरोना मौत का कहर बरपा रहा है व्यवस्थाओ के नाम पर कागजी खानापूर्ति के अलावा कुछ नही ऑक्सीजन प्लांट पर ऑक्सीजन बनाने वाला लिक्विड खत्म हो चुका है स्थितयां विकराल हो चुकी है और साहबो का अभी भी ac कमरों का मोह खत्म नही हुआ अगर ऐसी होती है स्मार्ट सिटी तो लानत है इसी सिटी पर अस्पतालों में बेड नही मिल रहे फिर भी जनता कुछ न कहे क्यो।
गंभीर मरीजो को cmo रेफरल लेटर नही दे रहे क्यो इलाज न मिलने की वजह हो रही मौतों पर जिला प्रशासन चुप क्यों। अस्पतालों में ऑक्सीजन कि कमी आखिर व्यवस्था नही हो रही क्यो। क्या राजधानी की सड़कों पर लाशो के ढेर का इंतजार किया जा रहा। बेड नही ऑक्सीजन नही इलाज नही जांच नही आखिर क्यों। क्या इस तरह से बनेगा उत्तम प्रदेश। क्या इस तरह होगा एक भारत श्रेष्ठ भारत का निर्माण। अभी भी वक्त है जिम्मेदार अफसरों नही तो वुहान से बुरे हालात हो जायेगे। कम से कम जनता की फिक्र नही है आपको सीएम के आदेश ही मान लो। राजधानी की वास्तविक स्थित लिख दो तो लोग कहते है पैनिक सिचुएशन क्रेट कर रहे हो। राजधानी की रोती हुई आत्मा भी अब चीख रही है हमे राम भरोसे मत छोड़ो।







