
मध्य भारत में कड़ाके की ठंड ने मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान को सच कर दिखाया है, जहां इंदौर में तापमान रिकॉर्ड 4.5 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया- यह पिछले 10 वर्षों में सबसे कम न्यूनतम तापमान है। इस अप्रत्याशित गिरावट ने शहर को सामान्य सरदी की तुलना में कहीं अधिक ठंडा कर दिया है, और पारा कई स्थानों पर 10 डिग्री से नीचे दर्ज हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम से आ रही तेज और ठंडी हवाएँ तथा एक सक्रिय जेट स्ट्रीम उत्तर भारत में सर्दी को और अधिक तीव्र बना रही हैं। इन प्रणालीगत बदलावों के कारण भोपाल, इंदौर, सीहोर, शाजापुर और राजगढ़ जैसे जिलों में शीतलहर की चेतावनी जारी की गई है।
विशेष रूप से इस सर्दी की स्थिति के चलते मध्य प्रदेश के अन्य कई शहरों में भी तापमान में भारी गिरावट देखी गई। रायसेन, रीवा, शिवपुरी, उमरिया, नौगांव, मंडला, खजुराहो, छिंदवाड़ा, दमोह, रतलाम समेत अनेकों स्थानों पर न्यूनतम तापमान 5 से 9 डिग्री के बीच दर्ज हुआ।
इसके अलावा राज्य के कई प्रमुख शहरों में रात का पारा सामान्य से कई डिग्री कम रहा, जिससे लोगों को सुबह-शाम खासकर खुली हवा में निकलते समय कड़ी ठंड का सामना करना पड़ रहा है।
राजस्थान में भी ठंड का प्रकोप जारी है, जहाँ 20 से अधिक शहरों का न्यूनतम तापमान 10°C से नीचे दर्ज किया गया है और कई क्षेत्रों में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। फतेहपुर, नागौर, लुंकारनसर, दौसा, सिरोही आदि स्थानों पर अत्यंत ठंड में गिरावट का असर स्पष्ट दिखा।
उधर उत्तराखंड के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में नदी-नाले और जलधाराएँ जमने लगी हैं, विशेष रूप से ऊँचाई वाले इलाकों में जैसे उत्तरकाशी में छोटे झरने और प्रवाहित जल स्रोत बर्फ के परत में बदल गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर दैनिक जीवन में अपूर्ति संबंधी परेशानियाँ भी सामने आई हैं।सामान्य जीवन पर इस ठंड के प्रभाव के चलते स्कूलों में बच्चों को आगाह किया जा रहा है, वृद्धों और शिशुओं सहित सूक्ष्म समुदायों के लिए अलाव और गर्म वस्त्रों की व्यवस्था बढ़ाई जा रही है, तथा स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुबह-शाम कम समय में बाहर निकलने की सलाह दी है, ताकि सर्द मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से बचा जा सके








