
उत्तर प्रदेश विधानसभा ने एक अभूतपूर्व निर्णय लिया, जिसमें 13 अगस्त,को सुबह 11 बजे शुरू होकर 24‑घंटे तक “विकसित उत्तर प्रदेश‑2047” विषयक बहस हुई, जिसमें सरकार का उद्देश्य था 2047 तक राज्य के रूप में विकास की एक स्पष्ट रूपरेखा पेश करना था. इस सत्र में मंत्रियों की शिफ्ट‑वार उपस्थिति सुनिश्चित की गई और कुल 28 मंत्रियों को छह शिफ्टों में बांटकर रोस्टर बनाया गया, जिससे सदन हमेशा एक्टिव रहा
हालाँकि, इसके बीच विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रियाएँ दीं। सपा विधायक अतुल प्रधान ने चर्चा के दौरान अमेरिकी टैरिफ्स और ‘दोस्ती का ये कैसा सिला’ जैसे मुद्दे उठाए, और बयान दिया कि “हमें नहीं चाहिए मधुशाला,” जो संभवतः अमेरिकी प्रभाव की आलोचना थी । वहीं, विपक्षी दलों ने सरकारी विज़न पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विकास से अधिक ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ बनाम ‘रिजन डॉक्यूमेंट’ की ज़रूरत है — उन्होंने वादों की पूरा नहीं होने की बात उठाई. वहीं, सरकार ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह जानबूझ कर सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है। Excise मंत्री नितिन अग्रवाल ने कहा कि पिछले दिन भी विपक्ष ने नियमित रूप से बहस नहीं होने दी, और चेतावनी दी कि लोकतंत्र में जनता निर्णय लेने में सक्षम है.एक और महत्वपूर्ण घटना यह रही कि अस्थिरता के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मंत्री संजय निषाद का माइक बंद करवा दिया जब वे नियमों का उल्लंघन करते हुए लगातार बोलते रहे. सत्र के दौरान कई मंत्रियों ने विभिन्न विभागों की उपलब्धियाँ और योजनाएँ विस्तार से प्रस्तुत कीं. इंजीनियरिंग कॉलेज, सिंचाई नेटवर्क, ऊर्जा उत्पादन, महिला सशक्तिकरण जैसे विषय प्रमुख रहे








